प्राय: पूछे गये प्रश्न

विकिरण संसाधन

विकिरण संसाधन से हमारा तात्पर्य ऑयनाइजिंग विकिरण के उन नियंत्रित अनुप्रयोगों से है जिनमें वैद्युत-चुम्बकीय स्पैक्ट्रम की लघु तरंगदैर्ध्य विकिरण से प्राप्त होने वाली ऊर्जा का उपयोग किया जाता है । इन अनुप्रयोगों में गामा-किरणें, त्वरित इलैक्ट्रॉन तथा एक्स-किरणें सम्मिलित हैं ।

विकिरण संसाधन के कुछ प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • चिकित्सा और पैकेजिंग उत्पादों का निरजर्मीकरण
  • फलों और सब्जियों में संगरोध बाधाओं को दूर करना
  • खाद्य उत्पादों में कीट नाशन
  • कंद, बल्ब और रिज़्होमस में अंकुरण रोकना 
  • फलों के पकने की प्रक्रिया में देरी लाना
  • खाद्य पदार्थों में हानिकारक रोगाणुओं के विनाश द्वारा रख-रखाव सीमा में वृद्धि करना
  • खाद्य पदार्थों में रोगजनकों और परजीवी उन्मूलन
  • रबर एवम पॉलिमर में क्रॉस लिंकिंग के लिये उपयोग में लाना तथा
  • हीरे इत्यादि रत्नों के रंग में वृद्धि-विस्तार करना

नही. विकिरण संसाधन में हम इन खाद्य पदार्थों को मात्र विकिरण क्षेत्र से पास करते है जिस दौरान उन्हे गामा विकिरण से प्राप्त ऊर्जा  के प्रभाव द्वारा अपने वांछित ऊद्देश्य पूर्ति में सफलता मिलती है, क्योंकि कोई भी पदार्थ विकिरण स्त्रोत के सीधे सम्पर्क में नही आता इस कारण उनमें रेडियोसक्रियता पैदा होने का प्रश्न ही नही उठता। इसके अतिरिक्त जिन गामा विकिरण, एक्सरे या इलैक्ट्रॉन आदि का प्रयोग विकिरण संसाधन में किया जाता है उनकी अपनी ऊर्जा किसी पदार्थ को रेडियोसक्रिय तत्त्व में परिवर्तित करने में असमर्थ है ।

विकिरण संसाधित खाद्य पदार्थ से हमारा आशय उन पदार्थों से है जिनका किसी अपेक्षित गुण के लिये विकिरण द्वारा संसाधन किया गया हो । रेडियोसक्रिय खाद्य पदार्थ उन्हे कहा जाता है जिनके अंदर कोइ रेडियोन्युक्लॉईड पदार्थ मिला हुआ हो । जैसा उपर भी बताया गया है इस प्रकार की कोई भी दुर्घटना/आशंका विकिरण संसाधन प्रक्रिया के दौरान नही हो सकती ।

विकिरण संसाधन प्रक्रिया द्वारा खाद्य पदार्थों में कोई विशेष रसायनिक परिवर्तन नही होते । जो परिवर्तन होते भी हैं वे हानिकारक नही हैं ।  रेडियोलिसिस द्वारा प्रत्युत्पन्न अथवा फ्री-रैडिकल्स रसायनिक अभिक्रियाओं द्वारा संभावित बदलाब अन्य खाद्य प्रक्रियाओं जैसे कि पकाने के समय अथवा कैनिंग प्रक्रियाओं में भी देखे गये है या पाये जाते हैं। पिछले तीस सालों में वृहत वैज्ञानिक परीक्षणों के बाबजूद भी विकिरण संसाधित खाद्य पदार्थों में कोई नया रसायनिक तत्व नही पाया गया है ।

नही. इस बात का कोई प्रमाण सामने नही आया है जिससे यह सिद्ध हो कि विकिरण प्रक्रिया के दौरान उपजे फ्री रैडिकल अथवा रेडियोलिटिक उत्पन्नों के कारण खाद्य संरक्षा को खतरा हो ।  इस बात की पुष्टि के लिये दीर्घकालीन एवं कई पीढ़ियों पर किये गये वे परीक्षण है जिनमें प्रयोगशाला जानवरों को 45 किलोग्रे विकिरण डोस मात्रा दिये गये खाद्य पदार्थों पर पोषित किया गया और किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक परिणाम देखने में नही आये ।

नही. खाद्य संसाधन एवं परिरक्षण के अन्य विकल्पों की तुलना में विकिरण प्रक्रिया उनकी पौष्टिक गुणवत्ता पर सबसे कम असर करती है ।  विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह परिणाम समने आये है कि विकिरण संसाधन द्वारा प्रसंस्कृत खाद्यों में मुख्य पौष्टिक अवयव  जैसे कि प्रोटींस, कार्बोहाइड्रेट, वसा एवं खनिज में बहुत ही सूक्ष्म परिवर्तन होता है ।   विटामिंस में कुछ संवेदनशीलता दिखाई देती है जो अन्य खाद्य संसाधन विधियों में भी देखी गई है । पौष्टिकता पर विकिरण का असर कई बातों पर निर्भर करता है - इनमें विकिरण डोस, खाद्य प्रकार, पैकेजिंग स्थिति प्रमुख हैं । 1 किलोग्रे डोस प्राप्त खाद्यान्न  में विटामिन मात्रा में प्राय: नगण्यसम प्रभाव होता है ।  खाद्य एवं कषि संस्थान (FAO), विश्व स्वास्थ्य संस्थान (WHO), तथा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संस्था (IAEA) की संयुक्त विशेषज्ञ समिति 1980 मे इस निष्कर्ष की घोषणा की कि विकिरण संसाधन द्वारा खाद्य पदार्थों में किसी प्रकार की पौष्टिक समस्या नही पैदा होती ।

अधिकांश मसाले खुले वातावरण में सुखाये जाते है या अन्य अभिक्रियाओं के लिये ऐसा करना पड़ता है इस कारण ये मसाले कई जीवाणुओं तथा रोगात्मक बैक्टीरियाओं द्वारा संदूषित हो जाते है । विकिरण संसाधन एक शीत प्रक्रिया होने के कारण मसालों की भंडारण अवधि बढाने का एक सफल तरीका है । मसालों को पैक अवस्था में संसाधित किया जाता है तथा इस प्रक्रिया में संदूषण को लगभग पूर्णरूपेण समाप्त किया जा सकता है । अन्य विधाओं की बनिस्बत इसमे कोई रसायनिक अवशेष भी नही रहते और मसालों के रंग सुगंध एवम अन्य संवेदी गुण भी बरकरार रहते हैं ।

नही, विकिरण संयंत्र मे इस प्रकार की कोई संभावना नही हो सकती । किसी दुर्घटना के कारण गामा किरणक का पिघलना लगभग असंभव है । विकिरण संयंत्र में कॉबाल्ट -60 द्वारा कोई विस्फोट नही हो सकता इसके अलावा क्योंकि रेडियोआइसोटोप दोहरे स्टेनलैस स्टील आवरण में सुरक्षित होता है इसलिये वातावरण में रडियोसक्रियता के रिसाव  होने का प्रश्न ही नही उठता ।

नही, इन संयंत्रों में कोबाल्ट-60 का प्रयोग मात्र विकिरण ऊर्जा स्त्रोत के रूप में किया जाता है जो एक लम्बी अवधि के बाद अ-रेडियोसक्रिय निकॅल में परिवर्तित हो जाता है । जब इन पैन्सिल स्त्रोतों की रेडियोसक्रियता बहुत कम रह जाती है तब इन्हे निष्पादन के लिये वितरक के पास वापस भेजा जा सकता है जहां इसके निष्पादन की समुचित व्यवस्था रहती है ।  

Updated: Saturday October 06, 2018 12:06