प्राय: पूछे गये प्रश्न

रक्त किरणन

कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीजों को खून चढाने के पश्चात इस बात की संभावना रहती है कि उन्हें टी - ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिजीज नामक बीमारी हो सकती है । इन मरीजों के लिये यह बीमारी अक्सर जानलेवा साबित हो सकती है।

इन रोगियों को रक्त देने से पहले गामा विकिरण द्वारा रक्त कोशिकाओं का किरणन करने से इसकी संभावना बहुत ही कम रह जाती है । परीक्षणों के आधार पर इस बात की समुचित पुष्टि हो चुकी है कि किरणित रक्त में टी - लिंफोसाइट्स की प्रचुरता मात्रा उस खतरनाक स्तर तक नहीं रहती जिससे मरीज की जान को ही खतरा हो जाये। सरलता से यह कहा जा सकता है क़ि रक्त किरणन 'टी - ग्राफ्ट वर्सस होस्ट डिजीज' समस्या का सर्वोत्तम उपाय या हल है।

रक्त किरणन के लिये 25 से 35 ग्रे (Gy) की विकिरण मात्रा निर्धारित की गई है ।

रक्त किरणन के लिये गामा विकिरण अधिक उपयोगी पाये गये हैं ।

नही, रक्त किरणन के लिये इन त्वरक यंत्रों के उपयोग की सलाह नही दी जा सकती । इन यंत्रो द्वारा दी की गई विकिरण मात्रा रक्त किरणन में अपेक्षित सटीकता एवं एकसारता का पालन नही करतीं इसलिये इस काम के लिये उनका उपयोग अवांछनीय है ।

गामा विकिरण पर आधारित रक्त किरणक में इन्ही बातों का विशेष ध्यान रखा गया है कि रक्त को प्राप्त  होने वली विकिरण मात्रा उचित हो एवं आसानी से मापी जा सके ।  आवश्यकता से अधिक विकिरण डोस (मात्रा) देने से संभव है कि रक्त में पाये जाने वाले कुछ उपयोगी अवयवों की भी हानि हो सकती है

हां,  सैद्धांतिक रूप से यह किया जा सकता है पर इस के लिये जिस स्तर की विकिरण मात्रा हमें देनी होगी उतनी विकिरण मात्रा स्तर  पर रक्त कोशिकायें भी जीवित नही बचेंगीं ।  इसलिये  एच आई वी निर्मूलन के लिये रक्त किरणन का प्रयोग नही किया जा सकता और न ही किया जाना चाहिये । अन्य जीवाणुओं एवं विषाणुओं के संबंध में भी यही तर्क दिया जा सकता है ।

नही, रक्त किरणक में उपलब्ध विकिरण ऊर्जा रक्त या उसके अवयवों को रेडियोसक्रिय नही कर सकती ।

Updated: Saturday October 06, 2018 12:54