प्राय: पूछे गये प्रश्न

चिकत्सकीय एवं जैविक उत्पाद  

रेडियोफार्मास्युटिकल्स से हमारा तात्पर्य उन रसायनिक पदार्थों से है जिनकी सरंचना में कोई रेडियोसक्रिय अणु हो तथा जिनका उपयोग मानविक रोग निदान अथवा रोग-चिकित्सा में किया जाता है ।

नाभिकीय औषध चिकित्सा-जगत की वह विशेष उपशाखा है जिसमें  नाभिकीय गुणों के आधार पर रेडियोसक्रिय न्युक्लाइड्स का रोग निदान और/अथवा आंतरिक शारीरिक अवस्था ज्ञात करने के लिये और बिना सीलबद स्त्रोतों को रोगोपचार के लिये उपयोग में लाया जाता है । 

विकिरण उपचार में बाह्य विकिरण बीम अथवा सीलबंद स्त्रोत द्वारा कैंसर प्रभावित अंगों में कैंसर का उपचार किया जाता है जबकि नाभिकीय औषध के में हम मौखिक या इंजैक्शन द्वारा रेडियोफॉर्मास्यूटिकल को आंतरिक रूप से शरीर में प्रवाहित कर गॉमा कैमरा द्वारा किसी अंग या टिश्श्यु की इमेज़ प्राप्त कर रोग के निदान में सहायता प्राप्त करते हैं । कुछ विशेष रेडियोफॉर्मास्यूटिकल्स का उपयोग कैंसर के उपचार में भी किया जाता है जहां रेडियोन्युक्लाईड्स से उद्भासित किरणें मुख्यत: कैंसर कोशिकाओं  को नष्ट करने में सहयक होती है ।

सिंटीग्राफी में रेडियोफॉर्मास्यूटिकल्स में विद्यमान रेडियोन्युक्लाईड से निष्कासित गॉमा किरणों को गॉमा कैमरा चित्रण तंत्र द्वारा प्राप्त सिग्नल की सहयता से प्रभावित अंग की एक इमेज़ तैयार की जाती है, इन तंत्रों मे NaI (Tl) क्रिस्टल और कम्प्यूटर की सहायता से शरीर में गामा विकिरण के विस्तार का पता लगाया जाता है जिसके आधार पर रोग निदान में विशेष सफलता प्राप्त हो सकती है ।

निदान में इंजैक्टेड रेडियोफॉर्मास्यूटिकल शरीर में कहां और कितनी मात्रा में केंद्रित हुआ है रोग से संबंधित जानकारी प्रदान करने में अत्यंत कारगर और सहायक सिद्ध हुआ है । ये परीक्षण शरीर में रेडियोफॉर्मास्यूटिकल इंजैक्ट करने के बाद एक समयावधि तक चलते है और उपलब्ध डॉयनामिक चित्र से उस अंग विशेष की अवस्था ज्ञात की जा सकती है और इसे रोग की स्थिति जानने के लिये उपयोग में लाया जाता है, जैसा कि मूगा (MUGA) द्वारा हृदय परीक्षण में हृदय के निष्कासन अंश ज्ञात करने में सहायता मिलती है । स्पैक्ट SPECT (सिंगल फॉटॉन एमिशन कम्प्यूटेड टोमोग्रॉफी ) में कैमरा अंग के पास 360 डिग्री घुमाते हुये त्रि-दिशात्मक चित्र उपलब्ध कराता है जिसके द्वारा संबंधित अंग का बेहतर इमेज़ विश्लेषण संभव हो पाता है और इस तरह अंग की भीतरी गहरी अंदरूनी स्थिति का सफल अनुमान लगाया जा सकता है ।

नाभिकीप औषध में 99एम Tc को वरीयता मिलने के प्रमुख कारण इसके निम्न लाभकारी गुण सम्मिलित हैं :

  • इसकी 140 किइवी कि गॉमा ऊर्जा उच्च कोटि गॉमा चित्र प्राप्त करने में विशेष सहायक है । इस ऊर्जा-मात्रा पर टिश्श्यु में अवरोध  के कारण कोई विशेष हानि नही होती ।
  • 99एम Tc  (T1/2: 6 घंटे)  के विघटन में लगभग नगण्य कणिकीय उत्सर्जन उतपन्न होता है, इसलिये 30-40 मिलीक्यूरी के 99एमTc  रेडियोफॉर्मास्यूटिकल्स बिना किसी दुष्प्रभाव आसानी से शरीर में इंजैक्ट किये जा सकते हैं । यह डोस बेहतर गुणवत्ता वाली इमेज़ और  विश्वसनीय जानकारी प्राप्त करने में सहायक रहती है ।
  • 99एमTc  की 6 घंटे की अर्द्ध-आयु अधिकांश नाभिकीय औषध अध्ययनों के लिये उपयुक्त पाई गई है ।
  • इसकी विविधता पूर्ण कैमिस्ट्री  विभिन्न रेडियोफॉर्मास्यूटिकल्स को आसानी से 99एमTc चिह्नित करने में सक्षम है ।
  • यह 99 Mo- 99m Tc जॅनरेटर द्वारा सुगमता से उपलब्ध कराया जा सकता है ।
  • इसके मूल-जनक 99 Mo आइसोटोप की  कीमत कम होने के कारण 99एम Tc  रेडियोफॉर्मास्यूटिकल्स की कीमत भी कम ही रहती है ।

किसी भी किट में अमुक रेडियोफॉर्मास्यूटिकल बनाने के लिये उपयुक्त सब अवयवों को संग्रहित किया जाता है,  ब्रिट टीसीके शीत किट्स और हॉर्मोन्स मात्रा अवलोकन हेतु आरआईए किट्स उपलब्ध कराता है ।

इन किट्स का उपयोग 99एम Tc  रेडियोफॉर्मास्यूटिकल्स बनाने के लिये किया जाता है । सामान्यतया इन किट्स में उपयोगी अवयवो - लिगैंड, अपचायक एजेंट, Sn (II) as SnCl2.2H2O, लॉयोसुरक्षक, स्थायीकारक और अन्य लाभकरी यौगिकों को उचित मात्रा और उपयुक्त पीएच (pH) पर किट में समन्वित किया जाता है ।

विधि के अनुसार यह किट स्टराईल सोडियम परटैक्नीटेट के उपयोग द्वारा अपेक्षित स्टराईल  99एमTc रेडियोफॉर्मास्यूटिकल्स इंजैक्टेबल बनाने में सहायक होती है।

अधिकांश नाभिकीय औषध परीक्षणों के दौरान रोगियों को प्राप्त विकिरण मात्रा का स्तर बहुत ही कम  और सीमा निहित होता है । कई बार यह कैट स्कैन से कम और कुछ अन्य परीक्षणों में उसके बराबर ही होता है, अर्थात इसे समुचित रूप से सुरक्षित मान सकते है । उपचार हेतु प्रयुक्त रेडियोफॉर्मास्यूटिकल्स में भी रोगी को मिलने वाले लाभ उनसे संबंधित खतरों से कहीं अधिक होते है ।

Updated: Saturday October 06, 2018 13:54